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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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मेरी शिकस्त को मौत मान बैठा है !

Posted On: 12 Dec, 2013 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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दिया जीने का नया मकसद, है अहसान किया ,
मेरे मक्कार मुख़ालिफ़ ने है अहसान किया !
…………………………………………….
मेरे आंसू पे ज़रा हंसकर मुख़ालिफ़ ने मेरे ,
गिर के उठने का है तोहफा मुझे ईनाम दिया !
………………………………………………..
मेरी शिकस्त को मौत मान बैठा है ,
मुख़ालिफ़ है रहमदिल मैय्यत का इंतज़ाम किया !
………………………………………………….
हादसे झेल जाऊं मुख़ालिफ़ ने दी हिम्मत मुझको ,
मुझे उकसाकर ज़र्रे से आसमान किया !
…………………………………………………..
मैं तो मर जाता अगर मुख़ालिफ़ न होता मेरा ,
मैंने हर जीत पर ‘नूतन’ उसे सलाम किया !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

December 13, 2013

मुखालिफ भी होते हैं जिनपे मेहरबान ,उन शख्सियत का दुनिया में स्थान और ही है .शानदार ग़ज़ल .


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