! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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मान जाओ बेग़म !!!

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Muslim Wedding Bride and Groom - stock photo

मान जाओ बेग़म घर छोड़ कर न जाना ,
इसे कौन संभालेगा ?घर छोड़ कर न जाना !
………………………………………………………….
सबसे पहले जागना , आँगन बुहारना ,
घर कौन संवारेगा ? घर छोड़ कर न जाना !
……………………………………………..
सुबह की पहली चाय ,शेविंग का गरम पानी ,
भला कौन उबालेगा ? घर छोड़ कर न जाना !
……………………………………….
मुन्नी के रिबन कसकर दो चोटियां बनाना ,
मुन्ना भी पुकारेगा ,घर छोड़ कर न जाना !
…………………………………………………………
अम्मी की कड़वी बातें और अब्बू का अकड़ना ,
गले कौन उतारेगा ? घर छोड़ कर न जाना !
………………………………………………
आलू मटर की सब्ज़ी ,गाज़र का मीठा हलवा ,
कौन पूरी उतारेगा ? घर छोड़ कर न जाना !
…………………………………………………..
बर्तन से लेकर कपडे ,दिन -रात चौका -चूल्हा ,
कौन खुद यूँ मारेगा ?घर छोड़ कर न जाना !
……………………………………………………………….
‘नूतन’ सुनो है भोली ; बेबस ,नादान ,बेग़म ,
शौहर मना ही लेगा घर छोड़ कर न जाना !

शिखा कौशिक ‘नूतन’

DATE-4DECEMBER2013 PUBLISHED IN DAINIK JAGRAN BLOGS

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yatindranathchaturvedi के द्वारा
December 5, 2013

शुभकामनाएं, सादर।

abhishek shukla के द्वारा
December 5, 2013

सम्पादकीय पर आपकी कविता पढ़ी, बेहतरीन….बधाई

sadguruji के द्वारा
December 5, 2013

आदरणीया DR. SHIKHA KAUSHIK जी,हास्य व्यंग्य की अच्छी रचना के लिए बधाई.दैनिक जागरण में इसका कुछ अंश मै पढ़ा था.

sinsera के द्वारा
December 4, 2013

बड़ा तगड़ा व्यंग्य मारा है शिखा जी…बेगमों की ज़रूरत इसीलिए तो होती है..आजकल कोई मुंह देखकर प्यार थोड़ी करता है….

bdsingh के द्वारा
December 4, 2013

 सु्न्दर —-   नारी के हुनर से संवरता है धाम सारा। इसकी ममता से ही पलता हैसंसार सारा।।

cpsingh के द्वारा
December 3, 2013

आपकी रचना पढ़, अनजाने में ही मैं मुस्कुराने लगा…..शुक्रिया….

jlsingh के द्वारा
December 3, 2013

अच्छा गाना सिखाया रूठी बेगम को मनाने का!

December 2, 2013

साड़ी ही असलियत खोल कर rakh dee hai aapne ki aakhir purush ko nari kee kis kis kam ke liy zaroorat hoti hai .bahut sundar .


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