! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

578 Posts

1451 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12171 postid : 656616

अपने शहर में हम मगर गुमनाम रह गए !

  • SocialTwist Tell-a-Friend

शहर शहर मशहूर हुए ;नहीं गुमनाम रह गए ,
अपने शहर में हम मगर गुमनाम रह गए !
…………………………………………….
गैरों ने दी इज्जत बहुत सिर पर बिठा लिया ,
अपनों की नज़र में मगर बदनाम रह गए !
……………………………………………………………….
हमने बचाया ऐब से अपना सदा दामन ,
हमको मगर ज़ालिम कई बेईमान कह गए !
………………………………………………..
हादसे सब झेलकर दिल बन गया फौलाद ,
आँखों के रास्ते मगर अरमान बह गए !
……………………………………………………………
हम दर्द अपना कह न पाये अपनी जुबां से ,
‘नूतन’ यूँ ही चुप रह के सब इल्ज़ाम सह गए !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjeevtrivedi के द्वारा
November 29, 2013

शिखा जी आपकी सुन्दर रचना है..प्रशंसनीय है..

November 28, 2013

बहुत सुन्दर हर एक शेर


topic of the week



latest from jagran