! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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तुम क़त्ल कर रहे इनका...?

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मत मारो मत मारो मत बेटियों को मारो ,
इनको भी हक़ जीने का ये जान लो हत्यारो !
………………………………………………..
ये नन्ही नन्ही कलियाँ चटकेंगी -महकेंगी ,
ये नन्ही नन्ही चिड़ियाँ फुदकेंगी -चहकेंगी ,
ये भी हैं अंश तुम्हारा , ये तो तनिक विचारो !
इनको भी हक़ जीने का ये जान लो हत्यारो !!
……………………………………………………
ये किरणें हैं सूरज की चमकेंगी चमकेंगी ,
ये दामिनी बन नभ में दमकेगी दमकेगी ,
ये झाँसी की हैं रानी मत अबला इन्हें पुकारो !
इनको भी हक़ जीने का ये जान लो हत्यारो !!
……………………………………………..
ये जननी ,माता ,पत्नी ,पुत्री व् प्यारी बहनें ,
हर रूप है महिमाशाली ,गरिमा के क्या कहने ,
तुम क़त्ल कर रहे इनका खुद को ही अब धिक्कारो !
इनको भी हक़ जीने का ये जान लो हत्यारो !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
November 28, 2013

वाह…….. क्या बात है ? अति उत्तम छांदस- प्रस्तुति | बहुत-बहुत बधाई !!

sanjeevtrivedi के द्वारा
November 25, 2013

सुन्दर रचना के लिये आपको बधाई…

seemakanwal के द्वारा
November 24, 2013

बहुत सुन्दर लिखा .आभार .माँ CHAHIYE तो बेटी बचाओ .


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