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दीपोत्सव महापर्व की हार्दिक शुभकामनायें

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दीपोत्सव

एक नहीं ले पांच पर्व , दीपोत्सव संग में लाया है ,
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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पांच पर्व का महापर्व ,जन-जन सर्वत्र मनाता है ,
कार्तिक मास की त्रयोदशी से ये आरम्भ हो जाता है ,
नीरस जीवन में रस भर दे इस उत्सव की ये माया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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त्रयोदशी का पर्व महा ;धनतेरस रूप में प्रचलित है ,
पूजे जाते धन्वन्तरी हैं ;आयुर्वेद के जनक जो है ,
स्वस्थ रहो -दीर्घायु हो वरदान इन्ही से पाया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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चतुर्दशी पर नरकासुर के वध का उत्सव मनता है ,
दीप जलाये जाते हैं ; यम का दीपक भी जलता है ,
वनवास काट आते रघुवर इस पर्व ने याद दिलाया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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आती है तिथि अमावस की इस पर होता लक्ष्मी -पूजन ,
तम पर प्रकाश की जीत का पर्व ,श्री राम आगमन हर्षित जन ,
चीर निशा -तम-जाल को ये प्रकाशित करने आता है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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अन्नकूट का पर्व महा आयोजित होता अगले दिन ,
इंद्र-कोप से रक्षा हित कृष्ण उठायें गोवर्धन ,
सामूहिक रूप से जन-जन ने अन्नकूट को खाया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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इस महापर्व का अंतिम पर्व ‘यम द्वितीया’ कहलाता है,
बहन यमी के भ्रातृ प्रेम की सबको याद दिलाता है ,
हो दीर्घायु भाई मेरा बहनों ने तिलक लगाया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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आओ जानें अब कारण भी दीवाली पर्व आयोजन के ,
आये थे राम वनवास काट तब दीप जले घर-आँगन में ,
घोर निशा को दीपों से आलोकित कर चमकाया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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कहते हैं हुआ इसी दिन था सर्वज्ञात समुद्र मंथन ,
क्षीरोदधि से निकले थे रत्न ;माँ लक्ष्मी प्रकट हुई तत्क्षण ,
इसीलिए लक्ष्मी-पूजन का अटल विधान बनाया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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सिक्खों में भी इस दिन जन-जन खुश होकर दीप जलाता है ,
औरंगजेब की कैद से मुक्त गुरु जी की याद दिलाता है ,
अत्याचारों के आगे कब वीरों ने भाल झुकाया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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कहते हैं कृष्ण कन्हैय्या ने इस दिन ही वरा कन्याओं को ,
दुष्ट असुर के चंगुल से छुड्वाया था राजाओं को ,
अंत पाप का करें प्रभु ये विश्वास जगाया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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महावीर,दयानंद ने इस दिन परम -धाम प्रस्थान किया ,
भक्तों ने दीप जला हर वर्ष नम्र ह्रदय से याद किया ,
सत्य-अहिंसा अपनाने का मार्ग हमें दिखलाया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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इसी दिवस पर रचना की विक्रमादित्य ने संवत की ,
किया पराजित शकों को व् शक्ति हर ली थी हूर्णों की ,
भारत-वीरो ने भुजबल से माता का मान बढाया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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महाराज बलि व् वामन की कथा लोक में कहें सुनें ,
पाताल लोक जब गया बलि देवों को राहत तभी मिले ,
तब हर्षित हो जलाये दीप ऐसा ही सुना-सुनाया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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प्रहलाद पिता हिरण्यकश्यप ; ऋषियों को अकारण कष्ट दिए ,
पुत्र ने पूजा विष्णु को ,उस पर भी अत्याचार किये ,
नृसिंह ने मारा आकर जब चहुँ हर्ष तब छाया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !
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दीपोत्सव संग जुडा ये सब हमको प्रतिपल सिखलाता है ,
नन्हे प्रज्वलित एक दीपक से अंधकार मिट जाता है ,
झूठ की सत्ता मिली धूल में सत्य आज मुस्काया है !
उत्साह असीम ,प्रफुल्ल ह्रदय ,उर में आनंद समाया है !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
November 3, 2013

अच्छी कविता,बधाई.आप को भी दीपोत्सव महापर्व की हार्दिक शुभकामनायें.

jlsingh के द्वारा
November 3, 2013

आप महान हैं! दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!


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