! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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सच को बेपर्दा होने दो !

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अब डरो नहीं अंजाम से तुम
जो होना है वो होने दो ,
हो जाये क़त्ल भले ही हम
सच को बेपर्दा होने दो !
…………………………………………
सच नहीं किसी की बेग़म है
जो रहे सात पर्दों में छिप ,
है नहीं किसी की लौंडी ये
जो हुक्म बजाये रहकर चुप ,
खामोश न रह अब खोल ले लब
सच्चाई इनको कहने दे !
हो जाये क़त्ल भले ही हम
सच को बेपर्दा होने दो !
…………………………….
घुट घुट कर अब सांसे न लो
खुलकर हुंकार भरो प्यारो ,
सिर कलम आज हो जाने दो
पर झुको नहीं हरगिज़ यारो ,
ज़ुल्म मिटाने को दिल में
आक्रोश का तांडव होने दो !
हो जाये क़त्ल भले ही हम
सच को बेपर्दा होने दो !
…………………………….
ऊँचा रुतबा ,श्रद्धा-भक्ति ,
लालच व् भय की बंदूके ,
सच के सीने पर तनी हुई
धमकाती मद की मय पी के ,
मर मिटने को तैयार रहो
शर्मिंदा झूठ को होने दो ,
हो जाये क़त्ल भले ही हम
सच को बेपर्दा होने दो !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
October 31, 2013

घुट घुट कर अब सांसे न लो खुलकर हुंकार भरो प्यारो , सिर कलम आज हो जाने दो पर झुको नहीं हरगिज़ यारो , ज़ुल्म मिटाने को दिल में आक्रोश का तांडव होने दो ! हो जाये क़त्ल भले ही हम सच को बेपर्दा होने दो ! ……………………………. मरे हुए लोगों को जिन्दा करने वाले शब्द आदरणीय शिखा कौशिक जी !

deepakbijnory के द्वारा
October 31, 2013

जाये क़त्ल भले ही हम सच को बेपर्दा होने दो ! वह शिक्षा जी

Imam Hussain Quadri के द्वारा
October 29, 2013

बहुत ही सही लिखा है आपने ये आपका लेख नहीं बल्कि आपके दिल कि आवाज़ है जिसे सबके दिलो में चुभना चाहिए बहुत बहुत मुबारक हो

October 28, 2013

सच नहीं किसी की बेग़म है जो रहे सात पर्दों में छिप , है नहीं किसी की लौंडी ये जो हुक्म बजाये रहकर चुप , खामोश न रह अब खोल ले लब सच्चाई इनको कहने दे ! हो जाये क़त्ल भले ही हम सच को बेपर्दा होने दो ! ……………………………. sach hai ye to ab ho hi jana chahiye .behad prabhavshali v sashakt prastuti .badhai .


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