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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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ठोक-पिटाई वक्त पे हो नए नए इन गुंडों की !

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Smart_boy : Young handsome man near window with sexy smile

न माँ की सेहत की चिंता , ना बाप के झुकते कन्धों की ,
तादाद बहुत है इस जग में अक्ल के ऐसे अंधों की !
…………………………………………………………
ये घंटों यारों संग जाकर चौराहों पर बैठे रहते ,
न फ़िक्र पढ़ाई की इनको न किसी काम और धंधें की !
तादाद बहुत है इस जग में अक्ल के ऐसे अंधों की !
………………………………………………………….
मित्रों की बाइक पर अक्सर ये मौज मनाते फिरते हैं ,
घरवालों को है नहीं खबर इनके इन गोरखधंधों की !
तादाद बहुत है इस जग में अक्ल के ऐसे अंधों की !
…………………………………………………………….
महंगा मोबाइल लेंगें ये वरना सुसाइड कर लेंगें ,
दहला देते माँ-बाप का दिल क्या कहिये इन हथकंडों की !
तादाद बहुत है इस जग में अक्ल के ऐसे अंधों की !
………………………………………………………………….
ये आसमान में उड़ते हैं नहीं पैर ज़मी पर ये रखते
ठोक-पिटाई वक्त पे हो नए नए इन गुंडों की !
तादाद बहुत है इस जग में अक्ल के ऐसे अंधों की !

शिखा कौशिक ‘नूतन’

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bdsingh के द्वारा
October 28, 2013

कर्कस शब्दों से आवारागर्दी को चेतावनी युक्त रचना।


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