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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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आज विवशता की लंका को आग लगाना है !!

Posted On: 18 Oct, 2013 Others,social issues,Celebrity Writer में

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संकट और विपत्ति से नहीं आँख चुराना है ,
जीवन की हर बाधा से सीधे टकराना है !
………………………………………………..
निज भुज बल पर हो विश्वास ,सबल मनोबल हो अपना ,
हम यथार्थ में परिणत कर दें ,देखा है जो भी सपना ,
आज विवशता की लंका को आग लगाना है !!
जीवन की हर बाधा से सीधे टकराना है !!
………………………………………………..
उमड़-घुमड़ कर आँखों से न हो अब अश्रु-वर्षा ,
कातरता का कटे शीश , ले हस्त शौर्य-फरसा ,
निज दुर्बलता के वध हेतु चंडी बन जाना है !
जीवन की हर बाधा से सीधे टकराना है !!
…………………………………………..
हँसे आसुरी शक्ति हम पर , सदा दुर्वचन बोलें ,
नहीं पलायन संघर्षों से , विश्वास न किंचित डोले ,
दुःख-अर्णव पर आशा सेतु हमें बनाना है !
जीवन की हर बाधा से सीधे टकराना है !!
…………………………………………..

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
October 19, 2013

जीवन की हर बाधा से सीधे टकराना है ! “युवा शक्ति इन पंक्तियों से सिख ले ” अच्छी रचना / मेरी एक रचना लिंग-भेद (एक लघु कथा) पर आपकी प्रतिक्रया चाहूँगा / http://rajeshkumarsrivastav.jagranjunction.com/2013/10/19/%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%AD%E0%A5%87%E0%A4%A6-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B2%E0%A4%98%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE/

October 19, 2013

उमड़-घुमड़ कर आँखों से न हो अब अश्रु-वर्षा , कातरता का कटे शीश , ले हस्त शौर्य-फरसा , निज दुर्बलता के वध हेतु चंडी बन जाना है ! जीवन की हर बाधा से सीधे टकराना है !! बहुत प्रेरक अभिव्यक्ति .आभार


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