! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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न हो पाए जंगल में कोई फाइट

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विक्की घोडा तेज़ दौड़ता ;

खुद पर था इतराता ,

हिन्-हिनाकर जोर-जोर से ;

हाथी पर रौब जमाता !

***********************

हाथी ने फिर अर्जी लिखकर ;

शेरू से करी शिकायत ,

जंगल के राजा ने रखी ;

जंगल में पंचायत !

***********************

विक्की बोला इतराने का

मुझको पूरा हक़ है ,

हाथी भी चिंघाड़ के बोला

तू तो नालायक है !

************************

दोनों की तू-तू मैं मैं से

शेरू का सिर चकराया ,

चुप हो जाओ दोनों अब तुम

जोर से था चिल्लाया !

**********************

सुन दहाड़ राजा की दोनों ;

एक दम से गए दहल ,

पंचायत में सन्नाटा था ;

सब थे गए संभल !

************************

एक दहाड़ भरकर शेरू ने ;

विक्की को समझाया ,

खा जाऊंगा पल भर में मैं ;

जो आगे इतराया !

************************

हाथी दद्दा बड़े काम के ;

झुककर करो सलाम ,

मिलजुलकर रहना है तुमको ;

इस का रखो ध्यान !

********************

आगे न हो पाए

जंगल में कोई फाइट,

विक्की बोला पूंछ हिलाकर ,

बॉस यु आर राइट !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

udayraj के द्वारा
October 4, 2013

बाल मनोरंजन के लिए बहुत ही खुबसुरत रचना । लाजवाब प्रस्‍तुति ।।

October 3, 2013

आगे न हो पाए जंगल में कोई फाइट, विक्की बोला पूंछ हिलाकर , बॉस यु आर राइट ! बहुत खूब शिखा जी .


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