! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

569 Posts

1437 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12171 postid : 605013

काश मुंह पर लात इसके मारती इंसानियत !

Posted On: 18 Sep, 2013 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हर तरफ चीखें ही चीखें चीखती इंसानियत ,
इन्सान को हैवान बनते देखती इंसानियत !
************************
ज़ख्म खाकर ज़ख्म देने का चढ़ा जूनून ,
हो गयी मजबूर कैसे रोकती इंसानियत ?
**************************
दिल सभी के जल रहे बदले की आग में ,
देख क़त्ल-ओ-आम छाती पीटती इंसानियत !
***************************
दुधमुहे बच्चों से माँ-बाप का साया छिना ,
देख मासूमों के आंसू टूटती इंसानियत !
************************
हँस रही हैवानियत खुनी खेल खेलकर ,
काश मुंह पर लात इसके मारती इंसानियत !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

September 19, 2013

bahut sateek .


topic of the week



latest from jagran