! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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निर्भया ने ली होगी सुकून की अब साँस !

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तारिख थी सोलह
सन दो हजार बारह ,
और दिसंबर मास !
**********************
हैवानियत की इन्तिहाँ ,
इंसानियत का क़त्ल ,
इंसानी जिस्मों में
वहशियत का वास !
***********************
निर्भया की आहें
जख्मों पे उसकी टीसें ,
गूंजती रही हैं
आज तक आस-पास !
**********************
दरिंदों को मिली फाँसी ,
कितना सुखद अहसास !
निर्भया ने ली होगी
सुकून की अब साँस !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

udayraj के द्वारा
September 16, 2013

दरिंदों को मिली फाँसी , कितना सुखद अहसास ! निर्भया ने ली होगी सुकून की अब साँस ! शिखा कौशिक ‘नूतन’ ******** एक बेहतरीन प्रस्‍तुति । काश हर निभर्या को जल्‍द न्‍याय मिले ………..

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 15, 2013

दरिंदों को मिली फाँसी , कितना सुखद अहसास ! निर्भया ने ली होगी सुकून की अब साँस !… सुंदर अभिव्यक्ति …..

bhanuprakashsharma के द्वारा
September 15, 2013

सुंदर अभिव्यक्ति। 


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