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वो पुरुष ही क्या जिसमे पौरुष के न हो दर्शन

Posted On: 12 Sep, 2013 Others,कविता,Junction Forum में

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वो पुरुष ही क्या जिसमे पौरुष के न हो दर्शन ,
विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !
**********************************************************
नीच दुष्ट राक्षस पिशाच की श्रेणी के नर ,
पौरुषहीन ही हैं करते बलात स्त्री का हरण !
विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !
*********************************************************
जिसका बुद्धि और भुजबल आकृष्ट कर ले नारी चित्त ,
उत्सुक सरिता बह चले अर्णव से करने को मिलन !
विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !
*************************************************
जिस नर में हो धीरता ,उदारता व् वीरता ,
उसके प्रति नारी उर में पनप जाता है आकर्षण !
विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !
******************************************************
पुरुषों में उत्तम कहे जाते हैं श्री राम क्यूँ ?
नारी के सम्मान हेतु काट देते हैं दशानन !
विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !
******************************************************
कृष्णा की पुकार पर दौड़कर पधारते ,
पूर्ण-पुरुष कहलाते है इसीलिए राधेकृष्ण ,
विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !

शिखा कौशिक ‘नूतन ‘



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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

सद्गुरुजी के द्वारा
September 21, 2013

पुरुषों में उत्तम कहे जाते हैं श्री राम क्यूँ ? नारी के सम्मान हेतु काट देते हैं दशानन ! विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण ! ****************************************************** कृष्णा की पुकार पर दौड़कर पधारते , पूर्ण-पुरुष कहलाते है इसीलिए राधेकृष्ण , विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण कविता की ये लाइने विशेष हैं.अच्छी कविता.बधाई.

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
September 16, 2013

सिखा जी ,,,पुरुष राम भी हैं ,  रावण  भी ,  फर्क सिर्फ संस्कारों का होता है ,,एक रघुकूल का ,,,,,,दुसरा ऱाक्षस कुल का ,,,,,,बस ,,,,,,,ओम ……शांति …….शांति शांति का जपते भगवान की माया देखो 

Bhagwan Babu के द्वारा
September 16, 2013

बहुत खूब… कमाल कर दिया आपने…

udayraj के द्वारा
September 15, 2013

नीच दुष्ट राक्षस पिशाच की श्रेणी के नर , पौरुषहीन ही हैं करते बलात स्त्री का हरण ! विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण ! बहुत खुब । 

jlsingh के द्वारा
September 13, 2013

बहुत ही सुन्दर –पुरुषों में उत्तम कहे जाते हैं श्री राम क्यूँ ? नारी के सम्मान हेतु काट देते हैं दशानन ! विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !

Pradeep Kesarwani के द्वारा
September 13, 2013

पुरुषों में उत्तम कहे जाते हैं श्री राम क्यूँ ? नारी के सम्मान हेतु काट देते हैं दशानन ! विवश हो जिसके समक्ष नारी स्वयं कर दे समर्पण !… सुंदर कविता …… बधाई स्वीकारें…….

September 12, 2013

bahut sahi likha hai .


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