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बेग़म ग़म मत देना

Posted On: 27 Jul, 2013 Others,कविता,Hindi Sahitya,कविता में

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बेग़म ग़म मत देना

दिल बहलाने को लाया हूँ बेग़म ग़म मत देना ,
खिदमत करवाने लाया हूँ बेग़म ग़म मत देना !
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सजने और सँवरने की है बेग़म तुम्हें आजादी ,
खुली जुबान पर गुर्राया हूँ बेग़म ग़म मत देना !
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नज़रों के तुम तीर चलाकर कर लो मुझको घायल ,
देख बगावत घबराया हूँ बेग़म ग़म मत देना !
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फ़र्ज़ निभाओ मगर कभी तुम हक़ की बात न करना ,
तानाशाह बन इतराया हूँ बेग़म ग़म मत देना !
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‘नूतन’ औरत की किस्मत में सारे ग़म पी जाना ,
कई दफा ये फ़रमाया हूँ बेग़म ग़म मत देना !!

शिखा कौशिक ‘नूतन’

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