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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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भारत की इस बहू में दम है -सोनिया गाँधी

Posted On: 9 Aug, 2012 Others में

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भारत की इस बहू में दम है -सोनिया गाँधी

२१ मई १९९१ की रात्रि को जब तमिलनाडु में श्री पेराम्बुदूर में हमारे प्रिय नेता राजीव गाँधी जी की एक बम विस्फोट में हत्या कर दी गयी वह क्षण पूरे भारत वर्ष को आवाक कर देने वाला था .हम इतने व्यथित थे…. तब उस स्त्री के ह्रदय की वेदना को समझने का प्रयास करें जो अपना देश ..अपनी संस्कृति और अपने परिवारीजन को छोड़कर यहाँ हमारे देश में राजीव जी की सहगामिनी -अर्धांगिनी बनने आई थी .मैं बात कर रही हूँ सोनिया गाँधी जी की .निश्चित रूप से सोनिया जी के लिए वह क्षण विचिलित कर देने वाला था -

”एक हादसे ने जिंदगी का रूख़ पलट दिया ;
जब वो ही न रहा तो किससे करें गिला ,
मैं हाथ थाम जिसका आई थी इतनी दूर ;
वो खुद बिछड़ कर दूर मुझसे चला गया .”

सन १९८४ में जब इंदिरा जी की हत्या की गयी तब सोनिया जी ही थी जिन्होंने राजीव जी को सहारा दिया पर जब राजीव जी इस क्रूरतम हादसे का शिकार हुए तब सोनिया जी को सहारा देने वाला कौन था ?दिल को झंकझोर कर रख देने वाले इस हादसे ने मानो सोनिया जी का सब कुछ ही छीन लिया था .इस हादसे को झेल जाना बहुत मुश्किल रहा होगा उनके लिए .एक पल को तो उन्हें यह बात कचोटती ही होगी कि-”काश राजीव जी उनका कहना मानकर राजनीति में न आते ”पर ….यह सब सोचने का समय अब कहाँ रह गया था ?पूरा देश चाहता था कि सोनिया जी कॉग्रेस की कमान संभालें लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया .२१ वर्षीय पुत्र राहुल व् 19 वर्षीय पुत्री प्रियंका को पिता की असामयिक मौत के हादसे की काली छाया से बाहर निकाल लाना कम चुनौतीपूर्ण नहीं था .

अपने आंसू पीकर सोनिया जी ने दोनों को संभाला और जब यह देखा कि कॉग्रेस पार्टी कुशल नेतृत्व के आभाव में बिखर रही है तब पार्टी को सँभालने हेतु आगे आई .२१ मई १९९१ के पूर्व के उनके जीवन व् इसके बाद के जीवन में अब ज़मीन आसमान का अंतर था .जिस राजनीति में प्रवेश करने हेतु वे राजीव जी को मना करती आई थी आज वे स्वयं उसमे स्थान बनाने हेतु संघर्ष शील थी .क्या कारण था अपनी मान्यताओं को बदल देने का ?यही ना कि वे जानती थी कि वे उस परिवार का हिस्सा हैं जिसने देश हित में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया .कब तक रोक सकती थी वे अपने ह्रदय की पुकार को ? क्या हुआ जो आज राजीव जी उनके साथ शरीर रूप में नहीं थे पर उनकी दिखाई गयी राह तो सोनिया जी जानती ही थी .

दूसरी ओर विपक्ष केवल एक आक्षेप का सहारा लेकर भारतीय जनमानस में उनकी गरिमा को गिराने हेतु प्रयत्नशील था .वह आक्षेप था कि-”सोनिया एक विदेशी महिला हैं ” . सोनिया जी के सामने चुनौतियाँ ही चुनौतियाँ थी .यह भी एक उल्लेखनीय तथ्य है कि जितना संघर्ष सोनिया जी ने कॉग्रेस को उठाने हेतु किया उतना संघर्ष नेहरू-गाँधी परिवार के किसी अन्य सदस्य को नहीं करना पड़ा होगा .

सोनिया जी के सामने चुनौती थी भारतीयों के ह्रदय में यह विश्वास पुनर्स्थापित करने की कि -”नेहरू गाँधी परिवार की यह बहू भले ही इटली से आई है पर वह अपने पति के देश हित हेतु राजनीति में प्रविष्ट हुई है ”.यह कहना अतिश्योक्ति पूर्ण न होगा कि सोनिया जी ने इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया बल्कि अपनी मेहनत व् सदभावना से विपक्ष की हर चाल को विफल कर डाला .लोकसभा चुनाव २००४ के परिणाम सोनिया जी के पक्ष में आये .विदेशी महिला के मुद्दे को जनता ने सिरे से नकार दिया .सोनिया जी कॉग्रेस [जो सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर आया था ]कार्यदल की नेता चुनी गयी .उनके सामने प्रधानमंत्री बनने का साफ रास्ता था पर उन्होंने बड़ी विनम्रता से इसे ठुकरा दिया .कलाम साहब की हाल में आई किताब ने विपक्षियों के इस दावे को भी खोखला साबित कर दियाकी कलाम साहब ने सोनिया जी को प्रधानमंत्री बनने से रोका था .कितने व्यथित थे सोनिया जी के समर्थक और राहुल व् प्रियंका भी पर सोनिया जी अडिग रही .अच्छी सर्कार देने के वादे से पर वे पीछे नहीं हटी इसी का परिणाम था की २००९ में फिर से जनता ने केंद्र की सत्ता की चाबी उनके हाथ में पकड़ा दी .
विश्व की जानी मानी मैगजीन ”फोर्ब्स ”ने भी सोनिया जी का लोहा माना और उन्हें विश्व की शक्तिशाली महिलाओं में स्थान दिया -

7

Sonia Gandhi
President
सोनिया जी पर विपक्ष द्वारा कई बार तर्कहीन आरोप लगाये जाते रहे हैं पर वे इनसे कभी नहीं घबराई हैं क्योकि वे राजनीति में रहते हुए भी राजनीति नहीं करती .वे एक सह्रदय महिला हैं जो सदैव जनहित में निर्णय लेती है .उनके कुशल नेतृत्व में सौ करोड़ से भी ज्यादा की जनसँख्या वाला हमारा भारत देश विकास के पथ पर आगे बढ़ता रहे बस यही ह्रदय से कामना है .आज महंगाई ,भ्रष्टाचार के मुद्दे लेकर विपक्ष सोनिया जी को घेरे में तत्पर है पर वे अपने विपक्षियों से यही कहती नज़र आती हैं-
”शीशे के हम नहीं जो टूट जायेंगें ;
फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .”
वास्तव में सोनिया जी के लिए यही उद्गार ह्रदय से निकलते हैं -”भारत की इस बहू में दम है .”
शिखा कौशिक
[विचारों का चबूतरा ]

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12 प्रतिक्रिया

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rahulpriyadarshi के द्वारा
August 15, 2012

अगर सोनिया जी अपना देश छोड़कर भारत आई तो इसमें पति के प्रति श्रद्धा जैसी कोई बात नहीं थी,राजीव से शादी से पहले भी वो अपना देश छोड़कर ही ब्रिटेन में होटल में नौकरी करती थी,और राजीव गाँधी की हत्या के बाद वो अपना अधिकतर टाइम बाहर ही बिताती थी,क्यूंकि राजीव गाँधी की मौत के बाद बैंक खातों से काले धन को जो मैनेज करना था,लेकिन भारत में उनका स्कोप कभी ख़त्म न हुआ,भारत वापसी पर प्रधानमंत्री पद ग्रहण करने से वंचित रह जाने पर भी सरकार के लगभर हर निर्णय उनकी ही मर्जी से होती है,लगभग सरकार उनकी गुलाम ही है,वास्तव में बहुत ताकतवर महिला है,यह महिला इतनी ताकतवर है की अकेले दम पर शांति,विकास,सौहार्द्र,खुश-हाली और आम भारतीय जनमानस के बीच दीवार बनकर पड़ी हुयी है.वैसे आपने इनके सख्सियत की भी बड़े सधे अंदाज में प्रस्तुति दी है,आपका लेखन सराहना के लायक है.

shikhakaushik के द्वारा
August 12, 2012

दिनेश जी स्वागत हेतु आभार .सोनिया जी ने देश हित में जो कार्य किये हैं उनकी उपेक्षा न करें .कहानी कुछ और नहीं है बस कुछ लोग गाँधी परिवार को बदनाम कर सत्ता सुख पाना चाहते हैं .

vasudev tripathi के द्वारा
August 10, 2012

लेख में कुछ छूट रहा है शिखा जी, Disclaimer- यह कहानी पूर्णतयः काल्पनिक घटनाक्रमों पर आधारित है तथा कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं| यदि कहानी में प्रयुक्त किसी विवरण घटना अथवा व्यक्ति के नामों का किसी व्यक्ति के साथ कोई जुड़ाव होता है तो यह एक संयोग मात्र होगा|| :) :D

    shikhakaushik के द्वारा
    August 12, 2012

    मन बहलाने को ख्याल अच्छा है .टिप्पणी हेतु आभार .

bharodiya के द्वारा
August 10, 2012

क्या सिर्फ दबंग महिलाका पति मरता है तब ही आसमान फट पडता है ? गरीब महिला का पति मरता है तो क्या फुल बरस्ते है ? क्या सोनिया की लायकात यही है की उसका पति मर गया ? ईटली छोड के आई है तो स्वार्थ के कारण आई है अरबों कमाने आई है, राजीवभाई तो प्यादा मात्र था । राजनीतिमें आई तो क्या भला कर दिया, देश को पाताल में दूबा दिया ।

    dineshaastik के द्वारा
    August 10, 2012

    आदरणीय शिखा जी, प्रथम तो मंच पर आपका स्वागत है। द्वितीय भरोदिया जी के विचारों से पूर्णतः सहमत हूँ। आपने अपने आलेख में केवल एक अधूरा पक्ष रखा है, जो सत्य से परे है। कहानी कुछ और है जो जन सामान्य के लिये समझना बहुत ही कठिन है। हाँ, राजनीति में रुचि रखने वाले एवं जागरूप नागरिकों को सच्चाई का जरूर पता है। इस संबंध में सुब्रमणियम स्वामी के आलेख तथा यूट्यूब पर देखिये। आपको विस्मित कर देने वाले पहलू  जानने को मिलेंगे। यदि ये आरोप गलत हैं तो काँग्रेस या नेहरू परिवार द्वारा उनका विरोध क्यों नहीं किया गया, क्यों सफाई पेश नहीं की  गई तथा क्यों नहीं मानहानि का मुकदमा दायर किया गया। आरोप बहुत ही प्रमाणित दीखते हैं। सोनिया जी राजनीति में सुनियोजित ढंग से आई हैं, किसी मजबूरी के कारण नहीं। कलाम जी ने आज अपनी पुस्तक में ऐसा क्यों लिखा यह जान का विषय है। इतने दिनों तक क्यों खामोश रहे। राष्ट्रपति  चुनाव के समय ही ऐसा क्यों। कौन सी डील थी। वर्तमान राजनीति  पूरी तरह ढील पर चल रही है। समझौतेवादी राजनीति का चलन बढ़ गया है। यही भ्रष्टाचार को मजबूती प्रदान करता है। सोनिया जी ने अंतरात्मा की आवाज के कारण प्रधानमंत्री का पद नहीं त्यागा, अपितु इसके और ही तार्किक कारण थे। जो आपको स्वामी जी के  आलेखों में मिल जायेंगे।

    bharodiya के द्वारा
    August 10, 2012

    कलाम को अमरिका द्वारा उनका अपमान करके उन की हैसियत बता दी । आप ये हो और सोनिया वो है । आन्ना की तरफ जाने का सोचना भी नही ।

    shikhakaushik के द्वारा
    August 12, 2012

    आप ह्रदय से कहिये क्या केवल सोनिया जी देश को पाताल में ले जाने के लिए जिम्मेदार हैं ?यूं.पी. में मायावती जीहो या कर्नाटक में येदुयरप्पा या बिहार में लालू -ये सब और ऐसे ही कितने हैं जो भारत के धरती पर जन्मे हैं पर देश के हितों के साथ क्या कर रहे हैं .हमें व्यापक सोच-विचार की आवश्यकता है .

    Santosh Kumar के द्वारा
    August 12, 2012

    आदरणीया ,.,..आपसे विनती है की कभी समय मिले तो मेरे ब्लॉग पर घूम जाइयेगा ,..कुछ न कुछ जरूर अच्छा लगेगा ,..येदी,लालू ,मुलायम ,माया जैसे सब मगरमच्छ की पूँछ इस अंतोनियो माइनो ने दाबी है ,..एक बार शिकंजा हटने दीजिए फिर देखेंगे की कौन कहाँ है ,…सोनिया गांधी विदेशी एजेंट है और इसका मकसद हिन्दुस्तान ,हिंदुस्तानियत तबाह करना है ,..शेष फिर कभी ,…वैसे हम भांड हैं ,.जरूरत पड़ने पर सोनिया के कसीदे भी गा सकते हैं ,..कभी जरूर याद कीजियेगा ,..सादर

pitamberthakwani के द्वारा
August 10, 2012

कौशिक जी ,बात तो पते की है पर हम यु नाराज हैं की जब जनता को कुछ नहीं मिल रहा है तो शासन को तो कोसना ही होगा,क्या कुछ कह पाने का भी अधिकार नहीं है जनता को? सोनिया जी की दर्द भरी कहानी से तो बात नहीं बनाने वाली?

    shikhakaushik के द्वारा
    August 12, 2012

    बात ये है की गठबंधन की सरकार में कई मजबूरी होती हैं जिसका प्रतिफल सबसे बड़े दल को भुगतना पड़ता है .द्रमुक नेताओं ने भ्रष्टाचार किया और ठीकरा फूट रहा है कॉग्रेस के सिर पर .कांग्रेस की बहुमत की सरकार आये तो कुछ बात बन सकती हैं .टिप्पणी हेतु आभार


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